Thursday, February 3, 2011

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कश्ती दरिया में………

Posted: 03 Feb 2011 09:07 AM PST

कश्ती दरिया में इतराए ये समझकर दरिया तो अपनी है इठलाऊं इधर-उधर किनारा तो है ही अपना ,ठहरने के लिए दम ले लूंगा मै भटकूँ राह गर पर उसे मालूम नही ये कमबख्त दरिया तो किनारों को डुबो देता है सैलाब में कश्ती को ये बात कौन बताये जालिम नादरिया अपनी न किनारा अपना

रोल मॉडल : क्या कहते हैं सितारे

Posted: 03 Feb 2011 01:29 AM PST

आमतौर पर यही माना जाता है कि कोई भी व्यक्ति शारीरिक, जैविक और वैचारिक स्तर से मिलकर बनता है। जैसे-जैसे व्यक्ति बढ़ता और विकसित होता है, इन स्तरों पर वह बड़ा होता जाता है और उसके ऊपर का स्तर पाता जाता है। यह परिवर्तन प्रकृति की नियति है और यह बदलाव निरर्थक नहीं, बल्कि हर दिन अपने भीतर जादू समेटे होता

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आज का सलाम, असांजे के नाम

Posted: 03 Feb 2011 01:10 AM PST

अब मैंने एक निर्णय लिया है कि अपने पढ़ने लिखने के कमरे व दफ्तर में आस्ट्रेलियाई मूल के हैकर से पत्राकारिता का प्रतिमान बन गए जूलियन असांजे का चित्रा अपने गुरुओं के चित्रों की बगल में लगाऊंगा। आज जहां दुनियां भर का मीडिया कूड़ा करकट परोस कर हमारे जीने की आजादी में सेंध लगाने के लिए एक दूसरे से आगे

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प्रेमियों का विवाह कराने पर उन्होंने मृत्युदण्ड पाया

Posted: 03 Feb 2011 12:42 AM PST

'वेलेण्टाइन डे' यानी प्रेम दिवस। 14 फरवरी को संपूर्ण विश्व में बड़ी तैयारियों के साथ मनाया जाता है, वेलेण्टाइन डे। सूचना क्रान्ति व सेटेलाइट के इस युग में यह दिवस बड़े शहरों में ही नहीं, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोकप्रिय होता जा रहा है। दुकानों पर विभिन्न कंपनियों के वेलेण्टाइन डे कार्ड हैं तो स्कूल/काॅलेज और होटल में

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मायावती अब मायापति बनी…..

Posted: 03 Feb 2011 12:18 AM PST

मायावती पहली दलित महिला मुख्यमंत्री है । दलित की बेटी कहलाकर अपने प्रति दयाभाव जगाती हैं। आज इनके पास भारत के सभी मुख्यमंत्रियों एवं सभी नेताओं से ज्यादा पूंजी है। अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा से तीन गुना ज्यादा धन इनके पास है।मायावती के पास लगभग एक अरब रूपए की पूंजी है। उन्होंने 26 करोड़ रूपये आयकर दिया है जो सभी राजनेताओं

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Wednesday, February 2, 2011

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भारत में आतंक क्यों ?

Posted: 02 Feb 2011 04:25 AM PST

जिस तरह से वर्षाऋतु में पानी बरसता है और पूरी प्रकृति का रंग हरियाली के रूप में बदल जाता है। क्योंकि पानी वृक्षों के लिये वरदान साबित होता है। और वह फलने फूलने लगता है। और उनसे असिमित फल, स्वच्छ हवा और न जाने क्या – क्या हम पृथ्वी पर निवासरत् जीवों को प्राप्त होता है। उसमें भी मनुष्य तो

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हिंसक न हो जाए रैली बची जंतर मंतर से संसद तक की राह में

Posted: 01 Feb 2011 05:24 PM PST

रामलीला मैदान से जतंर मंतर की भ्रष्टाचार विरोध की रैली ने दिल्ली की सोई खोई मुर्झाई या मुर्दायी जनता में जाग्रती लाने का छोटा सा प्रयास किया है पर संसद और सरकार ने इसे कतई महत्व नहीं दिया। आज आधे से कम को समझ आया है कल सबको आ जाएगा कि राज चलाने की जगह राज पर काबिज रहने के

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पता चला हम अपने ही क्षेत्र से हार गये

Posted: 01 Feb 2011 05:10 PM PST

पता चला हम अपने ही क्षेत्र से हार गये खड़े हुए थे चुनाव में, सोचा था जीत जायेंगे, पर हम थे छेद वाली नाव में , सोचा नहीं था डूब जायेंगे पार्टी वालो ने हमें चने के झाड़ पर चड़ा दिया, जहाँ से पार्टी हारती थी, वहाँ से चुनाव लड़ा दिया हम भी बिना सोचे समझे चने के झाड़ पर

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Saturday, January 22, 2011

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कब उठेगा महानायक के मौत के रहस्य से परदा

Posted: 22 Jan 2011 07:06 AM PST

नेताजी सुभाषचंद्र बोस। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक। ऐसा महानायक जिसका कद महत्मा गांधी से भी ज्यादा उंचा था। पर गांधी के नेहरू प्रेम से देश की राजनीति की ऐसी धारा बही कि इस महानयक को पूरी तरह से उपेक्षित कर दिया गया। आजादी के छह दशक बाद भी सरकार इस महानायक के मौत के रहस्य से परदा उठाने में कभी गंभीर नहीं रही।

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धुप कितना सेवन पर्याप्त

Posted: 21 Jan 2011 09:26 PM PST

आपकी पड़ोसिन क्या कहना चाह रही हैं। हमने भी इससे जुड़ी खबर को टी.वी. न्यूज में सुना है। दरअसल आप जो समझ रही हैं, बात वह नहीं है। बात यह है कि धूप स्नान करना चाहिए मगर थोड़ी देर, वह भी अगर सुबह की धूप हो तो ज्यादा फायदेमंद है न कि दिन भर धूप का सेवन करते रहें। ऐसे

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Friday, January 21, 2011

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देह हो गई दौलत

Posted: 21 Jan 2011 12:43 AM PST

भारतीय संस्कृति में मानव देह ईश्वर के उपहार की अनमोल अभिव्यक्ति है क्योंकि व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से राज्य, राज्य से राष्ट्र और राष्ट्र से अनन्त तक को पहचानने का माध्यम मानव देह ही है। आधुनिकता के बाजार में मानव देह बिकाऊ वस्तु बनती जा रही है यद्यपि शरीर धर्म का परोक्ष प्रारूप ही है और इस

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जहां पंछी आत्म हत्या करते हैं

Posted: 21 Jan 2011 12:18 AM PST

असम में एक गांव है जाटिंगा। यह गांव खासी जयंतिया पहाड़ियों में स्थित हाफलौंग से मात्रा तीन कि.मी. दूरी पर है। जाटिंगा, जो बीहड़ वनों में 3400 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है, आज भी इस रहस्य के कारण अनुसंधानकर्ताओं और पर्यटकों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है। यह मुख्य रूप से 'जयन्तिया' आदिवासियों का गांव है

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असम: कितनी सफल होगी उल्फा से वार्ता

Posted: 20 Jan 2011 11:54 PM PST

नए साल के पहले ही दिन असम में 'उल्फा' प्रमुख अरविंद राजखोवा की जेल से रिहाई से यहां के राजनैतिक माहौल में एक आशा की किरण दिखाई तो देती है मगर यह सब कुछ इतना आसान भी नहीं दिखता। नवंबर 2009 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका से गिरफ्तार कर भारत को प्रत्यर्पण पर भेजे गये राजखोवा को वार्ता के लिए

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Thursday, January 20, 2011

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न्यू मीडिया और खोपड़ी में बवंडर ( ब्रेन- स्टोर्मिंग सेशन का बचा-खुचा)

Posted: 20 Jan 2011 11:10 AM PST

2011 के स्वागत में बज रहे नगाड़ों से निकल रहे बेगाने स्वर ने बाजार की रफ्तार से बिछुड़े और पुरानी लीक से चिपके वैदिक काल के मूल्यों पर अटके पत्रकारों के कबीले के सन्नाटे को तोड़ दिया। माजरा समझने की कोशिश में उन्होंने जब नैतिकता के कल्पवृक्ष पर चढ़ कर झांकना शुरू किया तो बौखला गये। बेसुरे स्वर में ढोल

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श्री अशफाक उल्ला खां – मैं मुसलमान तुम काफिर ?

Posted: 20 Jan 2011 08:53 AM PST

अपनी कुर्बानियों से वतन की मिट्टी – पानी का कर्ज़ अदा करने वाले सिरफिरे मतवालों में श्री बिस्मिल के बाद अशफ़ाक़ उल्ला खाँ का ही नाम आता है । प्रस्तुत आत्मकथ्य में विशेष परिचय के उपखँड नाम से दिये परिशिष्ठ मे श्री बिस्मिल की चर्चा के बाद अशफ़ाक़ उल्ला खाँ साहब का परिचय जुड़ा दिखता है । अपने जीवनकाल में

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चौखट पर चीख, चौराहे पर चीरहरण

Posted: 20 Jan 2011 04:50 AM PST

सदियों से महिलाओं के साथ जैसा दमन और अत्याचार हुआ है वह अकल्पनीय है.सीता और पारवती की आर में पुरषों की साज़िश अब खुलकर सामने आने लगी है.एस देश में स्त्रियों की दशा बद से बदतर होती जा रही है. यह हमारे व्यवहार में आ गया है की हमने स्त्री दमन को सामाजिक स्वरुप दे दिया है. पुरूषों की भोगवादी

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स्त्री का अस्तित्व और सवाल

Posted: 20 Jan 2011 03:12 AM PST

एक सवाल अपने अस्तित्व पर, मेरे होने से या न होने के दव्न्द पर, कितनी बार मन होता है, उस सतह को छु कर आने का, जहाँ जन्म हुआ, परिभाषित हुई,मै, अपने ही बनाये दायरों में कैद! खुद ही हूँ मै सीता और बना ली है, लक्ष्मण रेखा, क्यूंकि जाना नहीं है मुझे बनवास, क्यूंकि मै नहीं देना चाहती अग्निपरीक्षा…..

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पुरूष भी होते हंै पत्नियों द्वारा प्रताड़ित

Posted: 20 Jan 2011 02:18 AM PST

पति और सास ने बेचारी पूनम का रोज रोज के लडाई झगडे मारपीट से जीना दुश्वार कर रखा है। ये शब्द हमें हर रोज रोज कहीं न कहीं सुनने को जरूर मिलते हंै पर कहीं यह सुनने को नहीं मिलता कि पूनम ने अपने पति और सास का जीना दुश्वार कर रखा है, क्यों ? क्या बहू द्वारा पति और

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Wednesday, January 19, 2011

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न अति कट्टरता, न अति उदारता

Posted: 19 Jan 2011 10:53 AM PST

इस नश्वर संसार में कुछ भी चिरस्थायी नहीं है। कल जो था आज नहीं है। जो कुछ आज है कल उसमें से बहुत कुछ नहीं रहेगा। कल जो नये धर्म प्रकाश में आये थे, अल्पसंख्यक थे, वे बहुसंख्यकता की ओर कदम बढ़ा रहे है। जो कल बहुसंख्यक थे वे आज अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं। संस्कृति सभ्यतायें भी बदल रही

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हर प्रभाग में भ्रष्टाचारी बैठा है

Posted: 19 Jan 2011 10:03 AM PST

एक कहावत है 'हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा'। इसके पहले जो है, वह सब जानते हैं फिर भी कोई कुछ नहीं कर पाया। एक शाख पर उल्लू बैठा था, बदनाम चमन को कर डाला, हर शाख पर उल्लू बैठा है अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा। उल्लू से भी खतरनाक भ्रष्टाचारी हंै। भ्रष्टाचारी नेता देश

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Sunday, January 16, 2011

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हर घर में हो रहा है ‘सच से सामना’

Posted: 16 Jan 2011 06:02 AM PST

मेरा बच्चा हाथ से निकलता जा रहा है। कुल जमा सोलह साल का है पर मुझे पता है कि वो ड्रग्स लेने लगा है। उसकी हर जिद पूरी करते हुए मुझे लगा करता था कि जो कुछ कमा रहा हूं, इन्हीं बच्चों का ही तो है। मैंने उसे मोबाइल भी ले दिया और स्कूटी भी। देखता हूं कि पता नहीं

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